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मृत्यु के भय पर विजय - Victory over fear of death Rig Veda Quotes

ओ३म्
नमस्ते जी,🙏
आपका दिन शुभ हो!
मृत्यु के भय पर विजय - Victory over fear of death - Rig Veda Quotes in Hindi मौत से तुम डर न जाना।
मृत्यु भय पर विजय पाना।।
मृत्यो: पदं योपयन्तो यदैत, द्राघीय आयु: प्रतरं दधाना:।
आप्यायमाना: प्रजया धनेन, शुद्धा: पूता: भक्त यज्ञियास:।।
- ऋ० १०/१९/२ अर्थात - हे मनुष्यो! तुम 'मृत्यो: पदं योपयन्त:' मृत्यु के पैर उखाड़ते हुए 'यदैत' आगे बढ़ोगे, तभी 'द्राघीय आयु: प्रतरं दधाना:' दीर्घ आयु पाओगे, और ' प्रजया धनेन आप्यायमाना:' प्रजा और धन से भरपूर बनोगे, किन्तु इसके लिए तुम 'शुद्धा: पूता: यज्ञियास: भवत' शुद्ध, पवित्र और यज्ञमय जीवन बिताओ, संयम-सदाचार से रहो।

मृत्यु के कांटे गड़े हैं हर कदम पर।
जिन्दगी में पग उठाना तुम संभल कर।।

मौत से तुम डर न जाना।
मृत्यु भय पर विजय पाना।।

चरण चूमेगी स्वयं श्री-सम्पदा।
धान्यधन से पूर्ण होयेगी प्रजा।।

यज्ञमय जीवन निभाना।
राह उल्टी पड़ न जाना।।

शुद्ध मन की भावना रखना सदा।
ईश चरणों में झुके रहना सदा।।

।।ओ३म्।।
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महादेवी वर्मा के उभरते प्रश्न के गरजते उत्तर (मैं हैरान हूँ कविता का उत्तर)

🌼"भ्रामक उभरते प्रश्न आधारभूत गरजते उत्तर"🌸🏹🚩
"भ्रामक प्रश्न" ----------------------
" मैं हैरान हूँ "
 — महादेवी वर्मा,
(इतिहास में छिपाई गई एक कविता)

(1)'' मैं हैरान हूं यह सोचकर ,
किसी औरत ने क्यों नहीं उठाई उंगली ?
तुलसी दास पर ,जिसने कहा ,
"ढोल ,गंवार ,शूद्र, पशु, नारी,
ये सब ताड़न के अधिकारी।"

(2)मैं हैरान हूं ,
किसी औरत ने
क्यों नहीं जलाई "मनुस्मृति"
जिसने पहनाई उन्हें
गुलामी की बेड़ियां ?

(3)मैं हैरान हूं ,
किसी औरत ने क्यों नहीं   धिक्कारा ?
उस "राम" को
जिसने गर्भवती पत्नी सीता को ,
परीक्षा के बाद भी
निकाल दिया घर से बाहर
धक्के मार कर।

(4)किसी औरत ने लानत नहीं भेजी
उन सब को, जिन्होंने
" औरत को समझ कर वस्तु"
लगा दिया था दाव पर
होता रहा "नपुंसक" योद्धाओं के बीच
समूची औरत जाति का चीरहरण ?
महाभारत में ?

(5)मै हैरान हूं यह सोचकर ,
किसी औरत ने क्यों नहीं किया ?
संयोगिता अंबा -अंबालिका के
दिन दहाड़े, अपहरण का विरोध
आज तक !

(6)और मैं हैरान हूं ,
इतना कुछ होने के बाद भी
क्यों अपना "श्रद्धे…

तैत्तिरियोपनिषद् का वैदिक सुविचार - taittiriyopanisad quotes in hindi

🔥ओ३म्🔥
📕"तैत्तिरियोपनिषद्"⛳
भृगुवल्ली,दशमोऽनुवाक:, पञ्चम श्लोक ।

 💥स य एवंवित् । अस्माल्लोकात्प्रेत्य । एतमन्नमयमात्मानमुपसङ्क्रम्य ।
एतं प्राणमयमात्मानमुपसङ्क्रम्य ।
एतं मनोमयमात्मानमुपसङ्क्रम्य ।
एतं विज्ञानमयमात्मानमुपसङ्क्रम्य । एतमानन्दमयमात्मानमुपसङ्क्रम्य ।
इमांल्लोकान्कामान्नी कामरूप्यनुसञ्चरन् ।
एतत्साम गायन्नास्ते । हा३वु हा३वु हा३वु ॥

📝अर्थ -
(सः, यः , च, अयम्, पुरूषे, यः, च, असौ आदित्ये)
वह जो इस पुरूष मनुष्य शरीर में है और जो उस सूर्य में है ।
(सः, एकः) वह एक ही है (सः, यः, एवम्, वित् ) वह जो ऐसा जानता है (अस्मात् लोकात्, प्रेत्य) इस लोक से मरकर (एतम्, अन्नमयम्, आत्मानम्, उपसङ्क्रम्य) इस अन्नमय आत्मा कोश से आगे बढ़कर (एतम्, प्राणामयम्, आत्मानम्, उपसङ्क्रम्य) इस प्राणमयकोश से आगे बढ़कर (एतम्, मनोमयम्, आत्मानम्, उपसङ्क्रम्य) इस मनोमयकोश से आगे बढ़कर (एतम्, विज्ञानमयम्, आत्मानम् उपसङ्क्रम्य) इस विज्ञानमयकोश से आगे बढ़कर (एतम्, आनन्दमयम्, आत्मानम्, उपसङ्क्रम्य) इस आनन्दमयकोश से आगे बढ़कर (इमान्, लोकान्, कामान्, नीकामरूपी, अनुसञ्चरन् ) कामना के योग्य इन सब लोकों को …

कल के लिए कुछ न छोड़ो - Vedic Motivational Quotes in Hindi

मनुष्य कितना भोला है! आती मृत्यु से आँख मींच लेना चाहता है! आज का काम कल के लिए टालता है! कल किसने देखा है? कल क्या, अगले ही क्षण का मनुष्य को कुछ पता नहीं है। किसी सन्त ने ठीक कहा है―

"कल नाम काल का है और आज नाम 'अज' (मोक्ष) का है।"
कल के लिए कुछ न छोड़ो! जो छोड़ा तो समझो वह सदा के लिए छूट गया। शतपथब्राह्मण में कहा है―
न श्वः श्व इत्युपासीत् को हि मनुष्यस्य श्वो वेद।
कल-कल की बात मत करो ! मनुष्य के कल (आगामी) को कौन जानता है?

कल के लिए कुछ न छोड़ो - Vedic Motivation Quotes in Hindi बेस्ट वैदिक मोटिवेशनल कोट्स और श्लोक समय पर। समय का कितना महत्व है ये हमे हमारे वेद, उपनिषद, गीता महाभारत आदि ग्रंथों से पता चलता है। महाभारत (शान्तिपर्व) में महर्षि व्यास का भी यही अनुभव है―न कश्चिदपि जानाति किं कस्य श्वो भविष्यति।
अतः श्वः.करणीयानि कुर्यादद्यैव बुद्धिमान्।।
श्वकार्यमद्य कुर्वीत् पूर्वाह्ने चापराहिनकम्।
न हि प्रतीक्षते मृत्युः कृतमस्य न वा कृतम्।।
भावार्थ―कोई नहीं जानता कल क्या होने वाला है, अतः बुद्धिमान् व्यक्ति को कल का कार्य आज ही निपटा देना चाहिए, शाम के लिए कुछ भी न छोड़…

गायत्री मंत्र का अर्थ और जानकारी - Gayatri Mantra in Hindi

🌷गायत्री मन्त्र का प्रतिदिन जाप करें🌷
गायत्री मंत्र का अर्थ हिंदी में
ओ३म् भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्अर्थात्  - हे मनुष्यो! जैसे हम लोग (भू:) कर्म कांड की विद्या (भुवः) उपासना काण्ड की विद्या और (स्व:) ज्ञानकाण्ड की विद्या को संग्रहपूर्वक पढ़के (य:) जो (न:) हमारी (धी:) धारणावती बुद्धियों को (प्रचोदयात्) प्रेरणा करे, उस (देवस्य) कामना के योग्य (सवितु:) समस्त ऐश्वर्य के देने वाले परमेश्वर के (तत्) उस इन्द्रियों से न ग्रहण करने योग्य परोक्ष (वरेण्यम्) स्वीकार करने योग्य (भर्ग:) सब दुखों के नाशक तेज:स्वरूप का (धीमहि) ध्यान करे, वैसे तुम लोग भी इसका ध्यान करो।
गायत्री मंत्र के बारे में कुछ ज्ञान बाल्मीकि रामायण में एक जगह कहा है―कि और सबका छुटकारा हो सकता है,परन्तु कृतघ्न(किये हुए उपकार को न मानने वाला) का कहीं छुटकारा नहीं है।

जिस परमात्मा ने हमको इतना सुन्दर अमूल्य मानव-चोला दिया है और शुभ कर्म करने के लिए इस धरती पर भेजा है, उस परमात्मा को ही हम भूले बैठे हैं। सुबह-शाम उसकी महिमा का दीपक अपने ह्रदय में नहीं जलाते।
क्या यह कृतघ्नता नहीं है?

चाणक्य नीति सुविचार २ - Chanakya Niti Quotes in Hindi

चाणक्य नीति सुविचार - Chanakya Niti Quotes अत्यन्त कोपं कटुका च वाणी,
दरिद्रता च स्वजनेषु वैरम् ।
नीच प्रसंग ! कुलहीन सेवा,
चिन्हानि देहे नरक स्थितानाम् ।।
-  (चाण० नी० ७.१६)अर्थात्  - अत्यन्त क्रोध, कटु-वचन, दरिद्रता, दुष्टों का संग, अपने जनों से वैर, कुलहीनों (धूर्तों) की सेवा, ये सब चिह्न नरकवासियों की देह में रहते हैं अर्थात् ऐसे नर-नारी जहाँ रहते हैं वहीं नरक है। चाणक्य नीति वैदिक सुविचार १ - Chankya Quotes in Hindi

यजुर्वेद वैदिक सुविचार १ - Yajurved Vedic Quotes

Yajurved Vedic Quotes in Hindi वेदाहमेतं पुरुषं महान्तमादित्यवर्णं तमसा परस्तात् ।
तमेव विदित्वाति मृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय ।।
- (यजु० ३१/१८) अर्थात - मैं उस महान पुरुष (ब्रह्म,परमेश्वर) को जानूँ, जो सूर्य के समान देदीप्यमान और अज्ञान-अन्धकार से सर्वथा रहित है। उसी को जानकर मनुष्य मृत्यु को भी लाँघ जाता है। उसे जाने बिना मृत्यु से छूटने का, मोक्ष की प्राप्ति का और कोई उपाय नहीं है।